सृष्टि का विकास
जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।
दुनिया को चलाने वाला एक ही अल्लाह परमात्मा गोड कबीर परमेश्वर एक ही के अनेक नाम है। वो सतलोक में सशरीर रहता है उसका नाम कविर्देव है ।
उस परमेश्वर ने छः दिन में सृष्टी की रचना की तथा सातवें दिन तख्त पर जा विराजा ।वह अविनाशी परमात्मा राजा के समान दर्शनीय है उन्होंने अपने ही समान मनुष्य की रचना की
हजरत ईसा जी ने जो चमत्कार किए वो तो पहले से ही निर्धारित कर्म थे। उन कर्म को तो सिर्फ़ पूर्ण परमात्मा ही बदल सकते हैं जिसका प्रमाण वेद भी देते हैं परमात्मा कबीर साहेब पाप विनाशक हैं
यजुर्वेद अध्याय 8 मन्त्र 13 में कहा गया है कि परमात्मा पाप नष्ट कर सकता है। संत रामपाल जी महाराज जी से उपदेश लेने व मर्यादा में रहने वाले भक्त के पाप नष्ट हो जाते हैं।परमात्मा साकार है व सहशरीर है (प्रभु राजा के समान दर्शनीय है)
यजुर्वेद अध्याय 5, मंत्र 1, 6, 8, यजुर्वेद अध्याय 1, मंत्र 15, यजुर्वेद अध्याय 7 मंत्र 39, ऋग्वेद मण्डल 1, सूक्त 31, मंत्र 17, ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 86, मंत्र 26, 27, ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 82, मंत्र 1 - 3